jump to navigation

कोई अच्छी खबर लिख दे.. September 20, 2006

Posted by राही in गज़ल.
1 comment so far

कहता है तू शायर है
मशहूर, काबिल, मशरूफ भी
गर ताकत है कलम में तेरी
मेरी तनहाईयों का मंजर लिख दे !

लिख दे पता,  मेरी मंजिल का
जो दिल से गुजरे, वो डगर लिख दे ! 

लिख मैंने कैसे, तय किये ये फासले
है कैसे गुजरा, मेर ये सफर लिख दे !

लिख दे दास्ताँ गुमनामी की
किसने बरपाई है कहर लिख दे !

लिखते हुए ‘गर थक जाये
बदहाली की कहानी
रुककर थोड़ी खुशहाली की,
कोई अच्छी खबर लिख दे..

3-4-94