उपगुप्त September 27, 2006
Posted by राही in मेरी कवितायें.trackback
यह कविता रविन्द्र नाथ टैगोर कि इंग्लिश कविता, जो की इसी नाम से थी, का हिन्दी रुपांतरण है. उपगुप्त के बारे में बहुत सारी कथाँए प्रचलित हैं. मैं उन सब कथाओं को एक जगह एकत्रित कर प्रस्तुत करुँगा. इस समय मैने इस कविता के लिये एक अलग पेज बनाया है:
http://rahi.wordpress.com/upgupta/
मैने पुरी कोशिश की है कि असल कविता के साथ अन्याय ना हो !
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