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उपगुप्त September 27, 2006

Posted by राही in मेरी कवितायें.
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यह कविता रविन्द्र नाथ टैगोर कि इंग्लिश कविता, जो की इसी नाम से थी, का हिन्दी रुपांतरण है. उपगुप्त के बारे में बहुत सारी कथाँए प्रचलित हैं. मैं उन सब कथाओं को एक जगह एकत्रित कर प्रस्तुत करुँगा. इस समय मैने इस कविता के लिये एक अलग पेज बनाया है:

http://rahi.wordpress.com/upgupta/

 मैने पुरी कोशिश की है कि असल कविता के साथ अन्याय ना हो !

सत्य की तुलना September 27, 2006

Posted by राही in मेरी कवितायें.
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दीप है दिल का
 आशा की ज्योति
  विश्वास के सीप  में
   प्यार के मोती !

सुन्दरता के फुल हैं
 व्यवहार की महक
  मस्ती की मय में
   उल्लास की बहक !

कल्पना के पंख
 खुशी की चहक
  प्यार के विहग में
   मिलने की लहक !

मृदुभाष हवा
 कान की दीवार
  होंठ कमल से
   झंकृत हृद तार !

समर्पण सागर में
 विश्वास धार
  चंचल नदी का
   सम्बल पार !

प्यार के उपवन में
 धोखे का फूल
  सुधा गुलाब बीच
   गरल सा शूल !

भावना की आंधी में
 कर्तव्य की धूल
  जज़बात पेड है तो
   पत्त्तियाँ उसूल !